ग्रहों का आकार गोल क्यों है बेहद शोचनीय सवाल है कि सभी ग्रहों का आकार गोल क्यों है? ऐसे ही बहुत से हैरान कर देने वाले सवालों के जवाब वैज्ञानिकों द्वारा खोजे जा चुके हैं। और वही अंतरिक्ष से संबंधित कुछ ऐसे सवाल आज भी ऐसे है जिन्हें सुलझाने में फिलहाल तो मनुष्य पीछे ही है या कह सकते हैं कि फिलहाल असमर्थ है पर हो सकता है समय के बढ़ते बाकी के सवालों के जवाब खोज लिए जायेगे। फ़िलहाल हमारा मुख्य सवाल है कि सभी ग्रह गोल क्यों है? 

तो चलिए हम समझते हैं कि किस तरह सूर्य मंडल में मौजूदा ग्रहों का आकार गोल क्यों है? 

ग्रहों का आकार गोल क्यों हैं? 

नासा के अनुसार ग्रहों का आकार :

ग्रहों का आकार गोल क्यों है

दुनिया के सबसे बड़ी खगोलविज्ञानी संस्था नासा के अनुसार ग्रह के गोल होने का मुख्य कारण है ग्रहो में होने वाला गुरुत्वाकर्षण और हर ग्रह का अपना गुरुत्वाकर्षण होता है जो कि गृह की हर सतह और किनारों पर बराबरी से लगता है। गुरुत्वाकर्षण केंद्र से लगता है और वह हर किनारे को अपनी तरफ आकर्षित करता है जैसा कि आप किसी साइकिल के पहिये से समझ सकते हैं। ठीक उसी प्रकार। इसी वज़ह से ग्रहो का आकार गोल या (sphereical ) होता है। यह  त्रि-आयामी चक्र three dimensional  है। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

छोटे बड़े पर सभी ग्रह गोल क्यों? 

सूर्य मंडल में मौजूद सभी आठों ग्रह एक दूसरे से काफ़ी अलग अलग है यहा तक कि इनका आकर भी छोटा बड़ा है।इसके साथ ही सभी ग्रहो की दूरी सूर्य से अलग अलग स्थानो पर है कुछ छोटे और पथरीले है, परंतु फिर भी यह माना जा सकता है कि सभी ग्रह गोल ही है आखिर सभी ग्रह गोल क्यों? 

आखिर किसी ग्रह का आकार चौकोर या त्रिकोणीय या किसी और आकारों के क्यु नहीं है?(ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

 अंतरिक्ष में मौजूद पदार्थ जब एक दूसरे से टकराते है तो किसी ग्रह का निर्माण होता है। और कुछ समय के बाद इनके अंदर खुद का गुरुत्वाकर्षण बनने लगता है और इनका आकर गोल होने लगता है। यह एक ऐसा बल होता है जो कि किसी भी पदार्थ को जोड़े रखता है अगर यह नहीं होता तो कोई ग्रह कभी बन ही नहीं पाता सिर्फ उनके कण ही अनंत ब्रहमांड में तैरते रहते। इस तरह से ग्रहो का गोल होना एक प्राकृतिक क्रिया है। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

जब ग्रहो का आकार ज्यादा बड़ा हो जाता है तो यह अपने आस-पास की जगह को साफ़ कर पाते है और यह अपनी कक्ष में सूर्य के चक्कर लगाने लगते है। और यह सब गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही सम्भव हो पाता है। 

सभी ग्रहो में हर तरफ हर किनारे से बराबर गुरुत्वाकर्षण बल लगता है।(ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

 क्या सभी ग्रहो का गोल होना निश्चित है? 

हालांकि सौर मंडल में सारे ग्रह बेहद सुन्दर और गोल है परंतु कुछ ग्रह अन्य ग्रहों की तुलना में ज्यादा गोल है बुद्ध (mercury ) और शुक्र (venus ) बाकी सभी ग्रहो के मुकाबले ज्यादा गोल पाए गए है। वे बिल्कुल किसी marvel के पत्थर की तरह गोल और संतुलित है। 

जबकि  सभी ग्रह पूर्ण रूप से गोल नहीं है। शनि और बृहस्पति बीच में थोड़े मोटे हैं। जैसा कि वे चारों ओर घूमते हैं, वे भूमध्य रेखा के साथ बाहर निकलते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आख़िर ऐसा क्यों है? 

जब कोई वस्तु घूमती है, मान लो जब कोई ग्रह घूमता है, तो उसका बाहरी किनारे वाले हिस्से को अंदर वाले हिस्से से ज्यादा तेज गति से घूमना पड़ता है, ताकि वह अंदर वाले हिस्से को अंदर रख सके । 

और यह बात हर चीज पर लागू होती जो भी तेज गति से घूमती है। जैसे कि कोई डीवीडी, साइकिल का पहिया या कुछ भी हो सभी पर यही नियम लागू होता है। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

कुल मिलाकर कहा जाए तो घूमती हुयी किसी भी वस्तु के किनारे की गति ज्यादा होती है उसके भीतरी हिस्से के मुकाबले। किनारे वाली चीजों को सबसे दूर और सबसे तेज़ यात्रा करनी होती। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

किसी भी ग्रह की भूमध्य रेखा (equator) से ग्रह दो भागों में बराबर होता है। और जब कि गुरुत्वाकर्षण उन्हें पकड़े रहता है फिर भी ग्रहो की गति इतनी तेज होती है कि गृह का हिस्सा उससे अलग छिटक कर गिरना चाहता है जैसे कि किसी टायर से मिट्टी छिटक कर गिरती है और इसके बावजूद भी गुरुत्वाकर्षण उसको पकड़े रहता है।(ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

 शनि और ब्रहस्पति वास्तविकता है बहुत बड़े ग्रह है और काफ़ी ज्यादा तेजी से घूमते हैं लेकिन गुरुत्वाकर्षण इन्हें फिर भी सम्भालने में सक्षम है। और यही मुख्य कारण है कि यह ग्रह बीच में मोटे होते है और पूर्ण रूप से गोल नहीं है। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

 शनि हमारे सौर मंडल के सभी ग्रहों में से सबसे अधिक मोटा ग्रह है जो बीच में सबसे ज्यादा उभार रखता है ।और अगर आप ध्रुव से ध्रुव इनके diameter  की तुलना भूमध्य रेखा से करे तो यह बिल्कुल भी बराबर नहीं है। शनि बीच में करीब 10.7% तक मोटा है और बृहस्पति 6.9% ।

मार्बल के पत्थर की तरह तरह गोल होने की जगह यह ग्रह किसी बास्केट बॉल की तरह है वो भी इस तरह जब कोई उनपर बैठा हो। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

क्या पृथ्वी गोल है या नहीं ? 

पृथ्वी और मंगल ग्रह छोटे है और इसके साथ ही इनके पास गैस है इस वज़ह से इनकी घूमने की रफ्तार भी कम है। यह पूरी तरह गोल तो नहीं है परंतु यह शनि और ब्रहस्पति की तरह फैले हुए भी नहीं है। और उनकी तुलना में पृथ्वी काफी गोल है। पृथ्वी मध्य में 0.3% मोटी है, और मंगल मध्य में 0.6% मोटा है।  चूंकि पृथ्वी और मंगल बीच में एक प्रतिशत भी मोटे नहीं हैं, इसलिए यह कहना सुरक्षित है कि वे बहुत गोल हैं।(ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

यूरेनस और नेपच्यून  भी इसी प्रकार बीच में मोटे है। यूरेनस  2.3% मोटा है और नेपच्युन 1.7% मोटा है ।ये ग्रह भी पूरी तरह गोल नहीं है परंतु गोल जैसे ही समझ आते हैं। 

कभी अपने आप को घुमाएं किसी कुर्सी या झूले पर बैठकर आप पाएगें की आपके शरीर के बाहरी हिस्से में ज्यादा दबाव महसूस होगा जब कि अंदर कम। ग्रहो का गोल होना या उनका आकर क्या है अब आप समझ गए होंगे।

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पृथ्वी गोल है यह किसने सिद्ध किया? 

पृथ्वी गोल है यह बात प्राचीन काल में युनानीयो के समय से ही सिद्ध हो चुकीं थी। और यह माना जाता है कि पाइथागोरस ने पहली बार यह सिद्ध किया था कि पृथ्वी गोल है करीब 500 BC पहले ।

उन्होंने इस बारे में कहा था कि  उन्होंने दिखाया कि चंद्रमा मूवमेंट टर्मिनेटर के आकार (प्रकाश में चंद्रमा के भाग और अंधेरे में चंद्रमा के भाग के बीच की रेखा) को देखते हुए गोल होना चाहिए।

  इसके कक्षीय चक्र के माध्यम से।  पाइथागोरस ने तर्क दिया कि यदि चंद्रमा गोल था, तो पृथ्वी को भी गोल होना चाहिए। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

कुछ समय बाद करीब 430 BC में Anaxagoras ने चंद्र ग्रहण के अनुसार यह सिद्ध किया था कि पृथ्वी गोल होती है। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

इस मामले में कई दावे किए जाते है कि कई वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया परंतु उनमे सबसे ज्यादा तथ्य और सबसे पहले दावा करने वाले यही थे माना जाता है कि एराटोस्थनीज ने पृथ्वी को त्रिज्या को नाप कर पहली बार पृथ्वी के गोल होने के संकेत दिए थे। 

 बाद में फर्नांड मैगलन के द्वारा 16 बी शताब्दी में उन्होंने पृथ्वी के गोल होने का दावा किया। 

ऐसे ही कई दावे किए जाते रहे हैं। (ग्रहों का आकार गोल क्यों है)

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धन्यवाद।। 

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By Nihal chauhan

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