Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? क्या करे जब आप खुदको अभीभूत महसूस करते हैं? जिंदगी आपको इतना नीचा दिखाने की कोशिश क्यों करती है? क्यों कुछ बाते कुछ विचार आपकी सोच को आपके जज्बे को तोड़ देते है? आप अपना विश्वास पूरी तरह खो देते हैं। आप खुद को किसी असहाय शिकार की तरह सोचने लगते हैं जो बस जीवन के अंतिम पड़ाव में होता है। 

हम अपने जीवन में कई बार खुद को हारा हुआ महसूस करते है।  एक ऐसा विचार जो आपके मन में आता है और आपको पराजय के समंदर में धकेल देता है। विचारों के इस द्वंद में आपका मन हार जाता है, आपको लगता है कि शायद सब कुछ व्यर्थ है, कुछ भी आपके मुताबिक नहीं होता। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

जो मेहनत आप करते है, और तब भी आपको उसके मुताबिक सफलता नहीं मिलती तब आप अक्सर इस तरह की मनस्थिति को महसूस करते है। चिंता की बात यह है कि इस तरह के विचार आपको पूरी तरह बर्बाद कर देते, यह आपको ह्रदय से चीर देते है। ऐसे समय में आपको खुद को बड़ी से बड़ी उपलब्धियां भी तुच्छ लगने लगती है और या तो आप खुदको कोसने लगते है या ईश्वर को। 

दर्द अस्ल जब आप खुद को हारा हुआ महसूस करते है तो ऐसे बहुत ही कम उपाय होते है जिनसे आपके मन को यथा स्थिति वैसी ही की जा सके जैसी वह पहले थी यानी कि समान्य। जीवन से हारने का अनुभव तभी होता है जब आप अपनी पुरजोर कोशिशों के बावजूद भी असफलता का सामना करते है या जैसा आप सोचकर बैठे हुए होते है उसके विपरीत होता है। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

खुद को हारा हुआ महसूस करना, शायद दुनिया की सबसे बड़ी तकलीफ देह समस्या है, लेकिन इसपर कोई ग़ौर नहीं करता। हर जगह से आपको सिर्फ निराशा हाथ लगती है। तो लगने लगता है कि 

” ईश्वर ने आपको शायद सिर्फ दर्द देने के लिए ही जिंदगी दी है तो इस तरह की जिंदगी को जी कर भी क्या करेगे? “ 

खुद को हारा हुआ महसूस करने के क्या कारण हैं? 

यहां हम आपको कुछ ऐसे कारण बता रहे हैं आम तौर पर लोग इनसे अभीभूत महसूस करते हैं :

रिश्ते और समाज – 

आपके प्रेमी या प्रेमिका के साथ जो संघर्ष चल रहा है उसके कारण। इस तरह की स्थिति में आप खुद को अलग थलग महसूस करने लगते हैं। आपको लगता है कि आपके जीवन का कोई महत्त्व ही नहीं है। 

स्वास्थ्य के मुद्दे – 

कई लोगों को अपनी बीमारी को लेके बड़ी चिंता हो जाती है। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उन्हें जो बीमारी हुयी है उसका मतलब मौत है जबकि ऐसा नहीं होता यह बस आपकी मानसिकता का एक ख्याली पुलाव है। कई बार तो लोग अपनी बड़ती उम्र को लेके भी चिंतित हो जाते है और अवसाद का शिकार हो जाते हैं। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

कैरियर के मुद्दे – 

अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्ति इतना ज्यादा गुल हो जाता है कि उसे पता ही नहीं चलता कि कब उसने चिंता की सीमा को पार कर लिया। आपके भविष्य में जो भी होगा वह आपके सामने आयेगा अभी से कुछ भी सोचना चिंता करना बेकार है। हालांकि आपको अपने प्लान बनाने चाहिए और निरंतर प्रयास करने चाहिए लेकिन इसमे चिंता का कोई स्थान नहीं है। 

नुकसान के कारण – 

उदाहरण के लिए, किसी प्रियजन के खोने का दुख, रिश्ते के अंत में समायोजन, आपको व्यापार में कोई बड़ा नुकसान हुआ जिससे आपके काम पर बेमानी होने के कारण ।

पैसे की कमी – 

उदाहरण के लिए, कर्ज का सामना करना, या किसी अपने कि जान बचाने के लिए पैसे ना जोड़ पाना। आप जिस तरह की जिंदगी जीना चाहते है, पैसे की कमी से उस तरह जीवन ना जी पाना यह सारी स्थितियां आपको एक जगह पहुंचाती है और वह जगह है कि आप खुद को हारा हुआ और भारीपन महसूस करने लगते हैं। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

जीवन से खुद को हारा हुआ महसूस करना क्या है? 

सबसे पहले तो आप यह जान ले की यह खुद को हारा हुआ महसूस करना या अभीभूत महसूस करना किसी भी तनाव और चिंता से अधिक खतरनाक और पीड़ादायक होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें, आप कुछ भी नहीं करना चाहते क्योंकि आप उत्साह रहित हो जाते है। 

आप कुछ भी करना ही नहीं चाहते क्योंकि आपको लगने लगता है कि आप कुछ भी कर ले लेकिन आपको जिंदगी बेकार ही रहेंगी। इस कारण से आप जो काम अपनी प्रगति के लिए कर रहे होते है, उसपर भी रोक लग जाती है और स्थिति और भी ज्यादा बदतर होती जाती है। आपको जल्दी से इससे बाहर निकलने के बारे में सोचना चाहिए। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

अभीभूत महसूस (खुद से हार जाने) होने के लक्षण – 

जब आप अभिभूत महसूस करते हैं, तो आप विभिन्न तरीकों से प्रतिक्रिया कर सकते हैं।  हालाँकि, इन सभी प्रतिक्रियाओं में सामान्य बात यह है कि आप अक्सर भावनाओं (फीलिंग्स) से भर जाते हैं – जैसे , क्रोध, अपराधबोध, भय – या  अन्य बहुत सारी भावनाओं का मिश्रण।(Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

अभिभूत होने के निम्नलिखित लक्षण आपको यह समझने में मदद करेंगे कि यह आपके साथ होने क्या लगा है:

  • मिजाज़ बदल जाना 
  • रोने का मन होना 
  • शारीरिक चिंता प्रणाली (जैसे, तेज़ दिल की धड़कन, सांस फूलना)
  • चिड़चिड़ापन
  • नींद न आना
  • भोजन, ड्रग्स, शराब, या सेक्स के साथ स्व-औषधि की इच्छा
  •  भविष्य के बारे में निराशावाद
  •  निरंकुशता की भावना या नियंत्रण की कमी
  •  मुश्किल से ध्यान दे
  •  आनंदित गतिविधियों में आनंद की कमी।

यदि आप इनमें से कोई भी संकेत को नोटिस करते हैं, तो संभव है कि आपके जीवन में कुछ – या एक से अधिक चीजें – आप पर हावी हो रही हों।  और एक बार जब आप अपने बारे में यह महसूस कर लेते हैं, तो अगला कदम एक प्रभावी प्रतिक्रिया उत्पन्न करना है जो आपको शांत करने और नियंत्रण करने में मदद करता है।

अब हम अभीभूत होने से बचने के लिए कुछ उपाय जानते हैं :

प्रकृति के नियमों को समझे – 

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यह एक विचार आपको किस तरह से तबाह कर सकता है, आप यह सोच भी नहीं सकते। आपको सही समझ ही नहीं है, कि जिंदगी क्या है? और इसे जीने का मकसद क्या है? सफ़लता नहीं मिलीं तो हार गए और दे दी जान?  क्या मरने के बाद आपकी समस्याओं का हल हो सकता है? जीवन की ख़ुशी आपके अस्तित्व से है, यदि आप खुद को गिरा हुआ महसूस नहीं करते तो यकीन मानिये आप खुदको बड़ा महसूस भी नहीं कर सकते। 

प्रकृति ने हर चीज जोड़े में बनाई है, जैसे सुख – दुख, दिन – रात आदि क्या आपने सोचा है उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? आखिर भावनाएं दो प्रकार की क्यों होती है – अच्छी और बुरी भावनायें ? 

हर चीज जोड़े में इसलिए है ताकि आप जीवन का आंनद ले सके, यदि दुख ही नहीं होता तो सुख की अभिलाषा कौन करता? बिना दुख के क्या सुख की कोई कीमत रहेगी? यदि आपको ऐसा लगता है कि आप दुनिया के सबसे बदकिस्मत और दुखी इंसान है तो सब्र कीजिए क्योंकि यह प्रकृति का नियम है – आप जितना दुःखी महसूस करते है, आप उतना ज्यादा खुशी महसूस करने के काबिल बन जाते हैं। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

जैसे कि रात के बाद दिन और दिन के बाद रात आपको दुखों से निबटने के लिए हमेशा तैयार होना चाहिए, ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि दुःख अब कभी आएगा ही नहीं। 

आपको यह मान लेना चाहिए कि जीवन है तो हमे स्थिरता दिखानी होगी, दुःख होता है तब भी और सुख है तो भी। आपके भीतर एक स्थिरता होनी चाहिए कि कितना भी दुख आ जाए आप दुखी नहीं होते और कितना भी सुख आ जाए आप अपनी खुशी को व्यक्त नहीं करते। सुख और दुख के बीच का जो रास्ता है आपको बस वही रास्ता चुन लेना है।

कौन क्या है? क्या फर्क पड़ता है – 

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यह एक परम सत्य है कि यह मनुष्य का स्वभाव है कि उसको दूसरों की सफ़लता से फर्क पड़ता है। लेकिन यह अलग अलग विचारो से होता है – कोई दूसरे की सफलता को देख कर यह सोचता है कि यह व्यक्ति क्यों सफल हो गया और उन्हें इसी बात का दुख होता है। और एक दूसरे प्रकार के लोग ऐसे होते हैं जो यह सोचते हैं कि – सामने वाले ने जो सफ़लता हासिल की वह ठीक है पर वह खुद क्यों सफल नहीं हो पाता, उसे इस बात का दुख है। 

दोनों ही परिस्थियों में दुख की शुरुआत किसी अन्य व्यक्ति की सफलता से ही हुयी। आप किस तरह के इंसान है यह बात आपसे बेहतर कौन जानता होगा। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

कोई फर्क नहीं पड़ता कौन क्या है? उसकी जिन्दगी क्या है और आपकी क्या है? उसके पास 50 गाड़ियां है और बंगला है और मेरे पास कुछ भी नहीं, इस तरह से मूर्खतापूर्ण विचारों से आपको बाहर निकलना होगा। हर इंसान की ख़ुशी अलग अलग होती है, अस्ल में जब आप उस अमीर व्यक्ति के पास जाओगे तो आप उसकी समस्याओं को सुनकर हैरान रह जाओगे क्योंकि उसके दुख आपसे बड़े है।

क्योंकि उसके पास जो दुख है, उनका इलाज करने के लिए उसका पैसा भी काम नहीं कर सकता। आपको यह जानकर खुशी होनी चाहिए कि आपके पास जो हल्के फुल्के दुख है तो उन्हें आसानी से पैसे से या अन्य किसी चीजों से दूर किया जा सकता है। 

खुद की मनोदशा खुद बनाए – 

आपको अपनी समझ में से तुलनात्मक रवैये को खत्म करना होगा। जब आप इन्हें सुख और दुख को बैलेंस करना सीख लेते है फिर आप एक ऐसी मानसिक स्थिति में पहुंचते है जिसे शांति कहते है। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

वहां कोई चिलम चिल्ली नहीं है, कोई तेरा मेरा नहीं, ना ही कोई तुलनात्मक बाते वहां सिर्फ असीम शांति है और आनंद है। इस स्थिति में पहुचने वाला व्यक्ति अपने जीवन का असली सुख उठाता है, और वह समाज में हो रहे नाटक और नौटंकियों को देखता है कि किस तरह लोग दोलत और शोहरत के पीछे पड़े हुए जबकि असल सुख तो स्थिरता में है। इस तरह की मनोदशा में आप कभी खुद को हारा हुआ महसूस नहीं करेंगे। 

अपनी चिंताओं को स्वीकार करना सीखें – 

आपने बचपन में एक कहावत तो सुनी ही होगी –

                     ” भय का भूत होता है ” 

अर्थार्त आप जिससे डरते है वह आपको और डराता है। ठीक उसी प्रकार जब आप उसका सामना करते है तो डर खुद डर कर भागने लगता है। चिंता चाहे जैसी भी हो लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि आप हमेशा परिपूर्ण है। हर स्थिति से सामना करने के एक दम तैयार है और आपको कोई कमजोरी नहीं है। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

बार बार आप जिन ख़्यालों से डरते है, आप उन्हें एक बार ठीक से सामने लाये और उनका सामना करके उन्हें खत्म करे।  आपको चिंता को इतना नहीं बड़ने देना की वह आपको अभीभूत करने के स्तर तक पहुंचा दे। आपको उसे पहले ही रफा-दफा कर देना चाहिए। 

अपनी साँसों की ताकत को समझे – 

मानसिक शांति की बात हो या स्वस्थ्य शरीर की जब बात एक अच्छे जीवन जीने की आती है तो हर कोई आपको श्वांस व्यायाम करने की सलाह देगा। आप मेडिटेशन करे यह भी प्रभावी है। कभी भी जब आपको ऐसा लगता है कि परिस्थित आपके हाथ से फिसल रही है और आप अभिभूत होने के कगार पर है तो आपको उसी समय आँखों को बंद करके लंबी लंबी साँसें लेना चाहिए। 

यह आपको धीरे-धीरे ऊर्जा भर देगा। यह प्रक्रिया आप अन्य कई तरह की चिंताओं से मुक्त होने के लिए भी कर सकते हैं। भाग दौड़ भरी जिंदगी में हमने सांसो पर ध्यान देना छोड दिया है लेकिन आपको यह याद रखना चाहिए कि हमारे शरीर की सबसे महत्पूर्ण क्रिया साँस लेना ही है और यह कई तरह के विकारों को दूर करने में सक्षम है। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

विशेष रूप से, साँस लेने के व्यायाम आपको शांत करने में मदद कर सकते हैं, यह आपके शरीर को आराम की स्थिति में वापस ला सकते हैं जहाँ आप अपनी स्थिति पर एक यथार्थवादी दृष्टिकोण प्राप्त कर सकते हैं। 

अपने दिमाग का फोकस बदलें

जब आप खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं , तो आपका ध्यान सिर्फ आपकी विशिष्ट समस्या तक सीमित हो जाता है, और आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि यह सब मौजूद है।

इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए आपको अपने दिमाग के फोकस को बदलना होगा यानी कि ऐसे समय में आपको कुछ करते रहना चाहिए जो आपको अच्छा लगे या अच्छा ना लगे फिर भी। आप चाहे तो शारीरिक करना शुरू कर दें।

TV देखे कोई खेल खेले या कुछ भी ऐसा करे जिससे आपका ध्यान बाँट सके। 

इस तरह की स्थिति से बचने के लिए सबसे प्रभावी काम है कि आप कोई Motivational book पढ़ने बैठ जाए। हम आपको कुछ चुनी हुयीं दुनिया की सबसे उपयोगी Motivational books यहां से उपलब्ध करा सकते हैं। देखने के लिए यहां क्लिक करें… 

स्थान बदल दे – 

कई बार एक ही जगह पर आपको कई सारे नकारत्मक विचार आते है और ऐसे में यदि आप कुछ देर के लिए अपने घर से बाहर निकल जाते है तो आप खुद को उत्साहित महसूस करा सकते हो।

जब भी ऐसा लगता है कि मन उदास हो रहा है तो अपने घर से निकल जाओ अकेले घूमने कहीं दूर या कहीं पास जितना दूर जायेगे आप उतना ज्यादा अच्छा अनुभव करेंगे। (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

खुद को सांत्वना दे – 

जब हम खुद को अभीभूत यानी कि हारा हुआ महसूस करते है तो हम नकारात्मकता के जाल में पूरी तरह फँस चुके होते हैं। जिंदगी क़ीमती है – आप ने क्या कमाया, क्या गंवाया यह सब कुछ मायने नहीं रखता। ऐसी स्थिति में आप खुद के प्रति बेहद आलोचनात्मक रवैय्या अपना लेते है जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है। 

ऐसे में आपको खुद को सांत्वना देनी चाहिए कि आप जो भी है बेहतर है और आपके अंदर और बेहतर बनने की काबिलियत है। आपको सोचना चाहिए आप जो भी है, आप खुद से संतुष्ट है आपने प्रयासों से संतुष्ट है। 

बार बार इसी तरह के positive विचारो का मनन करे और धीरे धीरे आप बेहतर महसूस करने लगेंगे। 

अपनी ख्यालों वाली दुनिया में चले जाए – 

Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ?

जब आप खुदको जिंदगी से हारा हुआ महसूस करते है तो इससे बाहर निकलना इतना आसान नहीं होता है। ऐसे में आपको इस तरह की मनोदशा से जल्दी से जल्दी बाहर निकलने के लिए अपने आप को नकारात्मकता से बचाने के लिए आपको खुद पर सकारात्मक हमले चालू कर देने चाहिए। 

बचपन में हम अक्सर अपनी ख्यालों की दुनिया बनाकर उसमे खुद की बादशाहत का लुफ्त लेते थे और खुशी होते थे। खुदको खुशी देने का यह सबसे प्रभावी तरीका है। आप जो चाहते है, आपको वह आपके ख़्यालों में तुरंत मिलता है। अभीभूत महसूस करने पर आप इस तरीके को अपना सकते है और खुद को ऊर्जावान महसूस करा सकते हैं।  (Jeevan Se Hara Hua Mehsus Karne Par Kya Kare ? )

आपको सिर्फ उस एक क्षण से निकलने और बचने के लिए हर सम्भव प्रयास करना होता है। यकीन मानिये जिंदगी कुदरत की बनाई सबसे खूबसूरत चीज है आपको अपने आप में खुश रहना सीख लेना चाहिए। आज कोई आपसे निकल भी गया तो क्या हुआ? क्या फर्क पड़ता है, कल किसने देखा है। दूसरों को देखने के लिए जिंदगी नहीं है, खुद को बेहतर बनाने के लिए और खुश रखने के लिए जिंदगी है। 

आपको एक मंत्र याद कर लेना चाहिए – 

” मैं हर दिन खुद को परिपूर्ण और खुश महसूस करता हूँ, और में दूसरों को प्यार देता हूँ और लेता हूं” ।। 

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By Nihal chauhan

मैं Nihal Chauhan एक ऐसी सोच का संरक्षण कर रहा हू, जिसमें मेरे देश का विकास है। में इस हिंदुस्तान की संतान हू और मेरा कर्तव्य है कि में मेरे देश में रहने वाले सभी हिंदुस्तानियों को जागरूक करू और हिंदी भाषा को मजबूत करू। आपके सहयोग की मुझे और हिंदुस्तान को जरुरत है कृपया हमसे जुड़ कर हमे शेयर करके और प्रचार करके देश का और हिंदी भाषा का सहयोग करे।

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