शिव की महिमा न्यारी है और सभी शिव के निवास स्थान के बारे में जानते है। रहस्यमय हिमालय हमेशा पवित्रता से जुड़ा रहा है। कैलाश पर्वत, जिसका नाम ही स्वयं शंभू के नाम से है, यह पर्वत कोई आम पर्वत नहीं है बल्कि यह सनातन मान्यताओं का सबसे महत्वपूर्ण पर्वत माना जाता है। कैलाश पर्वत को देवताओं और ऋषियों का निवास क्षेत्र माना जाता है।  

हिमालय शांति, पवित्रता और दिव्य ऊर्जा से भरा हुआ है।  जैसा कि विभिन्न संस्कृत शास्त्रों में उल्लेख किया गया है, विभिन्न ऋषियों, देवताओं, देवताओं और यहां तक ​​​​कि राक्षसों ने भी हिमालय पर तपस्या करके अपने इष्ट देव से अपना आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद सर्वोच्च शक्तियों को प्रसन्न किया ।

सनातन धर्म के सभी ग्रंथो और लिपियों में हिमालय का गुणगान मिलता है फिर चाहे वह, गीता रामायण, वेद पुराण, रामायण और महाभारत ही क्यों ना हो सभी में हिमालय को सर्वोच्च माना गया है। हिमालय के सभी पहाड़ों में सबसे प्रमुख कैलाश पर्वत को माना जाता है क्योंकि यह स्थान पृथ्वी के विध्वंसक का निवास स्थान है। 

बर्फ से ढके कैलाश पर्वत को शुरू से ही सबसे खास माना गया है क्योंकि यह महादेव के साथ साथ उनकी पत्नि पार्वती, उनके दो पुत्र गणेश और कार्तिक, उनकी पुत्री अशोक सुन्दरी और नंदी का निवास स्थान है। 

पश्चिमी तिब्बत में हिमालय के उत्तर में स्थित कैलाश पर्वत की ऊंचाई असीम है यह करीब 6, 638 मीटर ऊँचा है। 

Kailash parvat

प्राचीन ग्रंथों में कैलाश पर्वत को Cosmic Axis (ब्रह्मांडीय अक्ष) के रूप में जाना गया है। ना सिर्फ सनातन धर्म के अनुसार कैलाश पर्वत महत्वपूर्ण है बल्कि यह बौद्ध धर्म के लिए भी खास पर्वत माना गया है क्योंकि बौद्ध लोग इसे दुनिया के केंद्रीय शिखर, माउंट सुमेरु के रूप में पहचानते हैं, जो कि भारत का प्रतिनिधित्व करता हैं।  ज्ञान का अर्थ है ‘द फादर माउंटेन’, और जैन जिनके पहले पैगंबर, ऋषभदेव ने यही ज्ञान प्राप्त किया था।

इसीलिए कैलाश पर्वत को सिर्फ एक मामूली पर्वत समझना एक भूल क्योंकि यह एक पर्वत से कई अधिक महत्पूर्ण है। यह लोगों के लिए आध्यात्मिक केंद्र है जहां असीम शांति और ऊर्जा है। यह लोगों की एक पवित्र भावना का प्रतीक है, जिसका बेहद प्राचीन इतिहास है। 

कैलाश पर्वत के अनजाने रहस्य – 

हिमालय दुनिया भर के रहस्यों से भरा हुआ है, और आज भी वहां कई हैरतअंगेज कारनामे और चीजें देखी जाती है। यह कारनामे भारतीय और चीन की सेना द्वारा देखे गए हैं। इतनी ऊचाईयों पर सनातन संत बिना कपड़ों के ध्वनि रमा कर तपस्या में लीन है, वहां का तापमान माइनस में है, जहां पानी रख दे तो जम जाए ऐसी ठण्ड के बीच, ना वहां कुछ खाने को ना पीने को ऐसे माहौल में वे संत पहाड़ की चोटी तक कैसे पहुंच जाते है? , जहां बिना औजारों के चढ़ना असंभव ही है। इसके अलावा वे वहां इतनी सर्दी में जिवित कैसे है? ऐसे कई राज है जो कैलाश पर्वत समेटे हुए है। हम आपको कैलाश पर्वत की कुछ मुख्य विशेषताओं को बताना चाहेंगे – 

अनेक धर्मों में विशेष भूमिका रखने वाला पर्वत – 

कैलाश पर्वत किसी एक धर्म विशेष के लिए खास नहीं है बल्कि यह असमान्य पर्वत चार अलग-अलग धर्मों जिसमें हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और बॉन धर्म के लिए आस्था का केंद्र है। और यही मुख्य कारण है कि पर्वत की पवित्रता और शिखर में रहने वाली दिव्य ऊर्जाओं को बरकरार और हमेशा बनाए रखने के लिए पर्वत बिल्कुल भी चढ़ाई योग्य नहीं है। माना जाता है कि कैलाश पर्वत के शिखर पर मिलारेपा नाम का एक तिब्बती भिक्षु गया था वह, किस प्रकार ऊपर पहुंचा इस बात के कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं है लेकिन आम धारणा में माना गया है कि वह शिखर पर सबसे ऊपर पहुंचा था। और वापस लौटकर उसने सभी को बताया कि वहां रहने वाले भगवान को शांत और एकांत रहना पसंद है इसलिए उसने उन्हें परेशान न करने की चेतावनी दी।

मेरु पर्वत – सुमेरु पर्वत

 मेरु पर्वत का जिक्र सनातन धर्म ग्रथों में अक्सर मिलता है, लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह पर्बत प्राचीनकाल के आदिमानवो ने पत्थरों के टुकड़ों से बनाया हुआ एक मानव निर्मित पिरामिड है, जो प्राचीन काल में कुछ अतिमानवों द्वारा कुछ अन्य छोटे पिरामिडों से घिरा हुआ था । कुछ स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह पर्वत अंदर से पूरी तरह खोखला है और अंदर सिद्ध आत्मायें है। लेकिन हैरानी तब होती है जब पर्वत के बाहर से पर्वत के भीतर की कुछ अलौकिक घटनाओं का अनुभव होता है। 

कैलाश पर्वत के उत्तर पश्चिमी भाग में एक आध्यात्मिक शम्भाला नामक देश स्थापित जो काफी छोटा है। 

कैलाश कोर

कैलाश कोरा को कैलाश परिक्रमा भी कहा जाता है। सनातन धर्म और अन्य धर्मों में भी इसकी जानकारी मिलती है। यह परिक्रमा कैलाश पर्वत पहुंचने की सफ़लता का प्रतीक माना जाता है। कैलाश पर्वत के दक्षिणावर्त  के चारों ओर घूमकर यह परिक्रमा पूर्ण होती हैं। कुल मिलाकर यह परिक्रमा , 52 किमी की होती है। एक परिक्रमा पूरी करने में करीब करीब तीन दिन का समय लगता है। धर्मिक मान्यताएं है कि यदि कोई इंसान जीवन भर में कैलाश कोरा की एक परिक्रमा कर लेता है तो वह अपने जीवन के पूरे पाप धुल लेता है।और जो इंसान पूरी 108 परिक्रमाएं करता है वह निर्वाण या मोक्ष प्राप्त कर लेता है। 

कैलाश पर्वत – ज्ञान का स्त्रोत 

कैलाश पर्वत को ज्ञान का भंडार कहा जाता है क्योंकि यह देवो के देव महादेव की ध्यान स्थली है, आपने शिव जी को तस्वीरों में अक्सर कैलाश पर्वत पर बर्फ में बैठे हुए ध्यान करते हुए देखा होगा इसलिए इसे ज्ञान भंडार के रूप में समझा जाता है। इसीलिए संत कैलाश पर्वत पर तपस्या करने ध्यान लगाने जाते है और वहां उन्हें ज्ञान की प्राप्ति होती है। 

वही और भी कुछ ऐसे धर्म है जो कैलाश पर्वत को ज्ञान का स्त्रोत  मानते है। जैन धर्म के पहले पैगंबर ऋषवदेव के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने कैलाश पर्वत पर ही ज्ञान की प्राप्ति की और अपने पूरे ज्ञान और अंतर्दृष्टि को आराम दिया था और ऐसा ही बौद्धों के बीच विश्वास है।  इसलिए कैलाश ज्ञान का स्रोत माना जाता है।

धुरी मुंडी (Cosmic Axis

कैलाश पर्वत को पृथ्वी का केंद्र माना जाता है या फिर इसे पृथ्वी का स्तम्भ, ब्रह्मांडीय अक्ष और दुनिया की धुरी कहा जाता है। कई पौराणिक कथाओं में इस बात का उल्लेख मिलता है कि कैलाश वह भाग है जहा स्वर्ग और पृथ्वी का मिलन होता है। इसलिए इसे स्वर्ग का रास्ता भी कहा जाता है। कैलाश वह बिंदु है जंहा स्वर्ग और पृथ्वी का मिलन होता है। कैलाश पृथ्वी का केंद्र है इस बात को गणितीय रूप से सिद्ध किया जा सकता है। 

उत्तरी ध्रुव और कैलाश पर्वत के बीच की दूरी बराबर है।  जबकि दक्षिणी ध्रुव और माउंट कैलाश के बीच की दूरी पूर्ववर्ती दूरी से दोगुनी है, यह कैलाश के कॉस्मिक एक्सिस होने के दावों की पुष्टि करता है।

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देवताओ और राक्षसों की झीलें – 

हिमालय का कैलाश पर्वत सिर्फ देवताओं के लिए ही नहीं बल्कि राक्षसों के लिए भी खास था। यहां स्थिति दो झीलें इस बात की पुष्टि करती है। 

मानसरोवर झील – 

देवताओ की झील को मानसरोवर झील के नाम से जाना जाता है, जो बेहद पवित्र मानी जाती है। इस झील में जल जीवन पनप रहा है और मन को मोह लेने वाली सुंदरता पूरी तरह स्वर्ग का अनुभव कराती है। मानसरोवर झील दुनिया की सबसे ऊँचाई पर स्थित मीठे पानी की झील है। सनातन धर्म की लिपियों और दस्तावेजों के आधार पर कहा जाता है कि मानसरोवर झील में डुबकी लगाने वाले व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते है और वह स्वर्ग का भोगी बनता है। 

कैलाश पर्वत के दूसरी ओर राक्षसों की झील है, जिसमें कोई जल जीवन नहीं है। जहां तक नजरे जाती है सिर्फ कंकाल और हड्डियाँ नजर आती है। इस झील का पानी पूरी तरह खारा है और इसमे कोई भी जीव नहीं रहता। 

राक्षसी ताल  

दोनों झीलों के बीच कैलाश पर्वत है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मानसरोवर झील नीले सुंदर और शांत पानी के वाली झील है जिसमें अच्छी ऊर्जा है, जबकि दूसरी झील रावण द्वारा शिव को प्रसन्न करने के लिए बनाई गई थी जो पूरी तरह अशुद्ध और दुष्ट मानी जाती है।

राक्षसी ताल की खास बात यह है कि बिना हवा के बावजूद भी यह ताल हमेशा अशांत रहता है। माना जाता है कि दोनों झीलों के बीच स्थिति कैलाश पर्वत अच्छाई और बुराई को एक समान्य दर पर रखता है। इसीलिए दोनों झीलों में मानसरोवर को अच्छाई का प्रतीक और राक्षसी ताल को बुराई का प्रतीक माना जाता है। झीलों की तुलना yin yang के निशान से भी की गईं है जो अच्छाई और बुराई के संतुलन को दर्शाता है। 

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कैलाश पर्वत के चार मुख – 

कैलाश पर्वत के चार मुख मोटे तौर पर अन्य पर्वतों के जैसे  नहीं हैं, लेकिन फिर भी इसके अलग-अलग चार मुख हैं जो लगभग चार अलग-अलग दिशाओं के साथ संरेखित हैं।  प्रत्येक चेहरे के सभी किनारों को कार्डिनल बिंदुओं से पूरी तरह से जोड़ा जाता है। यह मूख कैलाश पर्वत को बाकी किसी भी पर्वत से अलग बनाते है। 

विष्णु पुराण के अनुसार कैलाश पर्वत के चारो मुख अलग अलग रत्न से बने हुए हैं। जिसमें दक्षिण का हिस्सा  लापीस लाजुली है, उत्तर का सोना , पूर्व में क्रिस्टल है और पश्चिम में माणिक (Ruby) है।

कैलाश पर्वत की पवित्र नदियां – 

कैलाश पर्वत के चारो ओर से कुल चार नदिया निकलती है जिसके पवित्र जल से तिब्बत और भारतीय उपमहाद्वीपों में विशाल आबादी इन नदियों के पानी पर निर्भर करती है। यह नदियां हिमालय से निकल कर पूरे एशिया में बहती है।  सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और करनाली कुल चार नदियां है जो कैलाश पर्वत को और अधिक पवित्र बनातीं है। 

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अंतिम विचार – 

कैलाश पर्वत बिल्कुल भी कोई आम पहाड़ और पर्वत नहीं है वास्तविकता में यहां से जुड़े आज भी कई ऐसे रहस्य है जिनसे आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है। यह आध्यात्मिकता और ज्ञान का केंद्र है यह सिर्फ एक सुंदर पहाड़ ही नहीं, बल्कि कई संतों और मुख्य रूप से स्वयं शिव के ज्ञान और तमाम विशेष शिक्षाओं का भंडार है, जिन्होंने उन्हें मानव जाति का मार्गदर्शन और कल्याण करने के लिए छोड़ दिया। 

हालांकि कैलाश के सभी रहस्य नहीं सुलझ सके है लेकिन रहस्यों से ज्यादा महत्वपूर्ण इसके आध्यात्मिक और सिद्घांत है। भारत और नेपाल से कैलाश जाने के लिए कई रास्ते है, और कई लोग वहां जाते भी है, लेकिन बहुत ही कम लोगों को वहां जाने की अनुमति होती है।  आध्यात्मिक और प्राकृतिक वातावरण से जुड़े लोगों के कैलाश से अच्छी जगह कोई हो ही नहीं सकती, जहाँ उन्हें ऊर्जा का भंडार मिलेगा। 

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By Nihal chauhan

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