सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोगों के बीच सनातन ग्रंथ और कथा महाभारत को लेकर चर्चा होती है। और जिस तरह से इसका वर्णन मिलता है यह कहानी अबतक की सबसे अविश्वसनीय कहानी मानी जाती है।  महाभारत सनातन धर्म के एक मुख्य स्तंभ के रूप में जाना जाता है जिसे गीता भी कहा जा सकता है। महाभारतकालीन युग और उससे जुड़ी कहानी और युद्ध के विवरण से कई पीढ़ियां सीख लेती आ रहीं हैं और आगे भी लेती रहेगी। 

अक्सर संका करते है कि यह कहानियां मात्र एक मिथक और मन को वहलाने वाली कहानियाँ हैं खासकर आज के नए युवा ग्रंथों पर विश्वास नहीं रखते। तो आज का हमारा लेख ऐसे ही लोगों की आंखे खोलने के लिए है जो महाभारत को सिर्फ एक मिथक या मनगढ़ंत कहानी मानते है। 

आज के ग्रंथो को पढ़े बिना, अपनी सुनी सुनाई राय लोगों के सामने रखते है, क्योंकि उन्होंने महाभारत टीवी पर देखा है लेकिन वह यह भूल जाते है कि यह कोई टीबी पर देखनी वाली चीज नहीं है ना कोई कोई इन्हें टीवी पर दिखा सकता है। हां टीवी पर आप नाटक दिखा सकते है जो सिर्फ आपके Time Pass के लिए बेहतर है लेकिन यदि आपको सत्य समझना है ईश्वर की कृपा को महसूस करना है तो आपको इन्हें खुद से पढ़ना होगा और महसूस करना होगा। 

कई लोगों का मानना ​​है कि महाभारत युद्ध द्वापर युग में हुआ यानि कि कलयुग के शरू होने से पहले हुआ। हालांकि कलयुग शरू होने की कोई तिथि निश्चित नहीं हुयी है। 

महाभारत वास्तविक घटना है ? महाभारत का कोई इतिहास है ? क्या इतिहास महाभारत होने की पुष्टि सटीकता से करता है ? 

महाभारत केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि अतीत में घटी एक घटना का विस्तृत विवरण है।  अगर हम आगे शोध करें तो महाभारत को साबित करने के लिए पर्याप्त पुरातात्विक और वैज्ञानिक प्रमाण हैं। नीचे दिए गए कुछ बिंदु यह दर्शाते है कि महाभारत एक मिथक नहीं बल्कि वास्तविक रूप से घटित हुयी घटना है।( महाभारत को सत्य घटना)

Table of Contents

1 .महाभारत खुद बताती है कि यह एक सत्य है – 

जी हाँ महाभारत खुद इस बात की पुष्टि करता है कि यह जो घटना है यह सत्य है, इतिहास है। यह इस बात से साफ़ होता है कि, इतिहासकारों द्वारा और भी कई ग्रंथ और मह्त्वपूर्ण किताबें खोजी गयी है लेकिन सभी किताबों पर इनकी शैली स्पष्ट रूप से लिखी गयी है। लेखक हमेशा से किताब की शैली का विवरण ऊपर ही दे दिया करते है। 

इसी तर्ज पर महाभारत के ऊपर पुराण और इतिहास लिखा हुआ है वहां लेखक ने यह बात साफ कर दी है कि यह कोई कहानी या कविता नहीं ब्लकि एक सत्य घटना और इतिहास है। यदि लेखक का इरादा कोई कविता या कल्पना का काम लिखने का होता, तो वह इसे “महा काव्य” या “कथा” कहता। ( महाभारत को सत्य घटना)

2. आदिपर्व, अध्याय 62 में उल्लेख है कि भारत-वंश के अभिलेख महाभारत में दर्ज हैं।

चलिए एक बार यह मान लेते है कि यह एक कल्पना है लेकिन कल्पना करने के लिए किसी वंश के 5 से 10 राजाओं के नाम होना पर्याप्त होने चाहिए। लेकिन जब आप महाभारतकालीन इतिहास को पड़ते है तो आप उसमे भरत वंश के राजाओं की पूरी सूची पाते है। अर्थार्त यह बात काफी तर्कसंगत मानी जाती है कि यदि महाभारत कोई काव्य होता या महाकाव्य होता तो इसमे सिर्फ कुछ ही राजाओं की कुछ ही पीढ़ियों के नाम होते लेकिन महाभारत एक इतिहास है इसलिए इसमें पूरी सूची जारी की गई है।  ( महाभारत को सत्य घटना)

3. महाभारत में मौजूद कलयुग का वर्णन। 

जो युग आज चल रहा है उसके बारे में महाभारत में पूरा ज्ञान दिया गया है। श्री कृष्ण ने जो कुछ भी कहा उससे आजकल की परिस्थितियां मेल खाती है और आपको यह भी नहीं भूलना चाहिए कि महाभारत हज़ारों साल पहले लिखा गया था इसलिए यदि यह कोई उपन्यास होता तो इसमें आज की परिस्थितियों से मिलान खाने वाली इतनी ज्यादा परिस्थितियां नहीं बनतीं। यह काल्पनिक हो ही नहीं सकता क्योंकि महाभारत से और आज के युग में कई समानताएं देखी जा सकती है। 

4. भारत में समुद्री पुरातत्व द्वारा गुजरात के समुद्री तट पर मिले द्वारिका के सबूत जो बताते है कि महाभारत एक सत्य घटना थी। 

द्वारिका दुनिया के लिए सबसे बड़े रहस्य की तरह है, माना जाता है कि प्राचीन शहर द्वारिका जो श्री कृष्ण द्वारा बसाया गया था वह पूरी तरह समुद्र के नीचे समा गया है। लेकिन गुजरात के तटवर्ती इलाक़ों से जो सबूत मिलते है वह द्वारिका को सही सिद्ध करते है। कई तरह के वैज्ञानिकों द्वारा शोध किए गए और विश्व स्तर के पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कुछ सबूतों को सही ठहराया और द्वारिका को सत्य होने की संभावना बताई है। और जब द्वारिका सत्य है तो महाभारत तो सत्य ही। द्वारका में एक संपूर्ण जलमग्न शहर, जो कि भगवान कृष्ण का प्राचीन बंदरगाह शहर,था इसकी विशाल किले की दीवारों, सिक्के , किले के अन्य सबूत और घाटों के साथ समुद्र में पाया गया है जैसा कि महाभारत और अन्य वैदिक साहित्य में वर्णित है।सबूतों को देखने के लिए यहां क्लिक करें…. 

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5. महाभारत ही इस बात की पुष्टि करता है कि श्री कृष्ण द्वारा बसाया गया शहर समुद्र में डूब गया। 

महाभारत में यह बात दर्ज है कि श्री कृष्ण द्वारा बसाया गया शहर द्वारका खाली होने के बाद जलमग्न हो गया। ग्रंथ के 7 वे अध्याय के 40 बे श्लोक में यह बात साफ बताई गई है कि धन और अनाज से समृद्ध द्वारका शहर समुद्र में लुप्त हो गया।  ( महाभारत को सत्य घटना)

6. भारत के कई क्षेत्रों से खासकर भारत के उत्तर भारत में 35 से अधिक स्थलों से पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त किए हैं और महाभारत में वर्णित प्राचीन शहरों के रूप में उनकी पुष्टि की गई है।

इन स्थलों में तांबे के बर्तन, लोहा, मुहरें, सोने और चांदी के आभूषण, टेराकोटा डिस्क और चित्रित भूरे रंग के बर्तन सभी पाए गए हैं।  इन कलाकृतियों की वैज्ञानिक डेटिंग भारतीय पुरातनता के गैर-आर्य-आक्रमण मॉडल से मेल खाती है। अर्थात्‌ ये सभी चीजे उसी समय की है जैसा कि वेदों में बताया गया है। 

7. रामायण और महाभारत में दर्ज राजवंश बिना किसी अंतर के सहमत हैं।

समझने वाली बात ये है ​​कि दोनों महान “महाकाव्यों” में जो विभिन्न राजाओं और उनके राजवंशों बताये गये है उनका संबंध है और वह एक दूसरे से मेल खाते हैं। सोचने वाली बात है कि यदि दोनों घटनाएं दो अलग-अलग समय पर दो पूरी तरह से अलग-अलग लिखे गए “महाकाव्य” थे, तो सब कुछ मामूली विवरण तक भी क्यों मेल खाएगा?  महाभारत रामायण की तुलना में बाद की तारीख में हुआ। महाभारत के लेखक रामायण के लेखक के समान विचारों और पात्रों को क्यों उधार लेंगे? अर्थात महाभारत के लेखक आखिर क्यों रामायण के राजाओं और पात्रों को अपने काव्य में लेंगे?  ( महाभारत को सत्य घटना)

8. यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज ने कहा है कि चंद्रगुप्त मौर्य श्री कृष्ण के वंश में 138वें राजा थे।

आपको यकीन करना मुश्किल हो सकता है लेकिन इसका मतलब है कि श्री कृष्ण पिछले युग में मौजूद थे और महाभारत वास्तव में हुआ था।

9. महाभारत में वर्णित और दर्शाये हुए सभी स्थान वास्तविक और असली स्थान हैं। जितनी भी जगह महाभारत में बतायी गयी है उन सभी को वास्तविक स्थानों के रूप में पहचान जाता हैं।

यदि आप जानना चाहते हैं कि हस्तिनापुर कहां है? तो मिसाल के तौर पर हस्तिनापुर उत्तर प्रदेश में है। वही इंद्रप्रस्थ वर्तमान दिल्ली है। द्वारका गुजरात तट पर स्थित है।  इसके अलावा, महाभारत के शहर वर्तमान भारत तक सीमित नहीं थे उनकी सीमा अनंत ही थी हैं क्योंकि महाभारत में भारतीय उपमहाद्वीप को भरत के रूप में संदर्भित किया गया है। उस समय इस धरती को भरत कहां जाता था।  ( महाभारत को सत्य घटना)

10. राजा भरत जो कि दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र है उन के नाम पर इंडिया का नाम भरत (भारत) पड़ा।आखिर पूरी दुनिया में ऐसा कौन सा देश है जिसका का नाम उपन्यास के नायक के नाम पर रखा जाएगा!

आप खुद ही सोचिए कि ऐसा कोई भी देश है क्या जिसका नाम किसी उपन्यास या कहानी के नाम पर रखा गया हो? और फिर महाभारतकालीन युग से जुड़ा पूरा इतिहास बताया गया है सभी वंशों से लेकर राजाओ का विस्तृत वर्णन दिया गया है। 

11. यूरोपीय विद्वानों के द्वारा 1500 ईसा पूर्व के बाद खानाबदोश आर्य जनजातियों को भारत में लाया।

अंग्रेजो ने हमे बेवक़ूफ़ समझ रखा है कि आप जो बोलेंगे वो हम सही मान लेंगे। आखिर ये आर्य जो खुद बाहर से आए ये लोग कैसे संस्कृत भाषा का निर्माण कर सकते थे? कैसे अचानक से , इतना ज्ञान प्राप्त कर सकते थे? और 700 ईसा पूर्व से पहले इन सभी ग्रंथों को कैसे लिख सकते थे?  यह सभी सवाल खुद का खुद एक जबाब है। लोकमान्य तिलक, श्री अरबिंदो और दयानंद सरस्वती सहित महान भारतीय विचारकों ने यूरोपीय सिद्धांत को सिरे से खारिज कर दिया है । ( महाभारत को सत्य घटना)

12. जरा विचार कीजिए कि यह कहना कितना हास्यास्पद है कि ये ग्रंथ अपनी काव्यात्मक प्रकृति के कारण काल्पनिक हैं। 

यानि कि आपको कुछ और नहीं मिला तो आप इस तरह के तर्क देंगे? ग्रंथ में दी गई एक एक घटना सब कुछ (यहां तक ​​कि गणितीय सूत्र) काव्यात्मक रूप में लिखने का कौनसा रिवाज था? । 

13. हमारे पुराणों और ग्रन्थों में गुप्त, मौर्य और इंडो-ग्रीक राजवंश भी दर्ज हैं।

यह राजवंश केवल इसलिए स्वीकार किए जाते है क्योंकि इन्हें ग्रीक इतिहासकारों ने भी दर्ज किया है। उन राजवंशों के बारे में क्या जो यूनानी इतिहासकारों से पहले मौजूद थे?

14. महाभारत दुनिया का पहला परमाणु युद्ध था। 

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि दुनिया की प्राचीन संस्कृति mohanjodaro विस्फोट से नष्ट हुयी और इस बात के उन्हें कई सबूत मिले की प्राचीन काल में यहां बड़ा धमाका हुआ और सब नष्ट हो गया उन्हें पिघले हुए कई प्राचीन सामान मिले। 

इसी प्रकार नादां दुनिया के लोग जापान पर गिरे पहले परमाणु बम गिराए जाने तक कोई यह नहीं जानता था कि इतना बड़ा विस्फोट भी हो सकता है लेकिन हमारे ग्रंथो में इनका उल्लेख प्राचीन काल से है अब आप ही सोचिए जब उस समय परमाणु ऊर्जा या बॉम्ब नहीं थे तो इतनी सटीकता से विस्फोट का वर्णन कैसे किया जा सकता है। हमारे ग्रथों में जो धमाके बताये गये वे पूरी तरह परमाणु बॉम्ब के धमाके से मेल खाते हैं। 

महाभारत में वर्णित एक श्लोक में – धमाके को इस प्रकार बताया गया। 

“धुएँ और ज्वाला का एक गरमागरम स्तंभ, जो दस हज़ार सूर्यों के समान चमकीला था, अपने पूरे वैभव के साथ उठ खड़ा हुआ।” 

15. मैनहट्टन प्रोजेक्ट के प्रभारी और आधुनिक परमाणु बम के वास्तुकार से मैनहट्टन परमाणु विस्फोट के बाद एक रिपोर्टर ने पूछा, क्या यह विस्फोट “पृथ्वी पर पहला परमाणु बम विस्फोट है?  इस प्रश्न का ओपेनहाइमर का उत्तर था, ” यह पहला परमाणु बम विस्फोट नहीं है , बल्कि आधुनिक समय में पहला परमाणु बम बन चुके है और विस्फोट भी हो चुके हैं “।  उनका दृढ़ विश्वास था कि प्राचीन भारत में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था।

कुछ अनुत्तरित सवाल : 

ओपेनहाइमर का मानना ​​है कि महाभारत एक परमाणु युद्ध था, महाभारत युद्ध में इस्तेमाल किए गए हथियारों का सटीक वर्णन महाकाव्य में है जो आधुनिक परमाणु हथियारों से मेल खाता है?  उन कहानियों में कितनी सच्चाई है जो दावा करती हैं कि कुरुक्षेत्र का एक क्षेत्र अभी भी उच्च स्तर की रेडियोधर्मिता दर्शाता है। 

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By Nihal chauhan

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