Maya kya hai ? आपने अक्सर लोगों को बोलते हुए सुना होगा कि सब  मोह – माया” है। लेकिन सत्य तो यह है कि इस तरह के शब्दों का प्रयोग करने वाले ही, माया से परिचित नहीं होते। असल में माया क्या है? या माया किसे कहते हैं? यह बहुत कम ही लोग जानते हैं, क्योंकि आजकल लोग आधुनिकता को बीन बजाने में लगे हुए हैं। जो अध्यात्म से जुड़ा है सिर्फ वही व्यक्ति माया को समझ सकता है, और उसकी व्याख्यान कर सकता है।

 हालांकि हमारे ग्रंथ हमे बताते है कि माया क्या है, लेकिन फिर भी लोगों ने उसके गलत मतलब ही निकाल पाए है। इसीलिए आज यह जानना और इसका प्रचार करना बेहद जरूरी है कि, असलियत में माया क्या है? 

अँग्रेजी में उपयोग होने वाला शब्द “Measure”  जिसका हिन्दी अर्थ होता है – “माप” लेकिन इस अंग्रेजी शब्द की जड़े संस्कृत के शब्द “माया” से जुड़ी हुई है। अर्थात्‌ माया का अर्थ हुआ, जो मापा जा सकता है। यदि यह कहा जाए कि यहां तो सब माया है तो आप समझिए की यहां सब मापा जा सकता है। (Maya kya hai ? )

अब देखिए आपके आसपास की कितनी ही चीजे है जो आसानी से मापी जा सकती है जैसे कि – दूरी को मापा जा सकता है, तापमान को मापा जा सकता है, पानी को मापा जा सकता है, आयतन को मापा जा सकता है इत्यादि चीजों को मापा जा सकता है। यहां तक कि समय को भी माप लिया जाता है। 

समझने वाली बात यह है कि – इस सृष्टि पर सिर्फ दो ही चीजे सब कुछ है, एक है समय और दूसरा स्थान और इत्तेफ़ाक कहो या कुछ और दोनों ही चीजों को मापा जा सकता है। इसीलिए इन्हें माया कहा जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो जिसे मापा जा सकता है, वह सब माया है।(Maya kya hai ? )

 जिसको नहीं मापा जा सकता वह माया नहीं है। अब आपको यह जरुर सोचना चाहिए कि आखिर ऐसा क्या है जिसे मापा नहीं जा सकता? और आप देखेंगे कि आपको आपका जबाब मिल गया है। 

अब सवाल उठाता है, कि आखिर सब कुछ माया है तो ऐसा क्या है जो माया नहीं? 

माया क्या नहीं है? 

Maya kya hai ?

दिमाग पर हल्का सा भी जोर लगाएंगे तो आपको समझ आएगा की दुनिया में सिर्फ वही चीज़े हमे मुल सुख दे सकती है, जो माया नहीं है या जिन्हें मापा नहीं जा सकता। 

क्या मापा नहीं जा सकता? क्या आनंद को मापा जा सकता है? या , प्रेम को? या फिर जीवन को? आपका जबाब ना ही होगा क्योंकि प्रेम, आनंद, दुख, तनाव आदि को मापा नहीं जा सकता है, जीवन को मापा नहीं जा सकता है, इसलिए इन्हें माया नहीं माना जाता है।(Maya kya hai ? )

 सत्य को मापा नहीं जा सकता।  सत्य, चैतन्य और आनंद – यही ईश्वर है।  परमात्मा क्या है?  “सत्” का अर्थ है सत्य, “चित” का अर्थ है चेतना, और “आनंद” का अर्थ है आनंद।  ईश्वर सत्य, चेतना और आनंद है – इन्हें मापा नहीं जा सकता।  और तुम भी यही हो!  आपकी आत्मा का स्वभाव आनंद है।  आनंद को मापा नहीं जा सकता, प्रेम को मापा नहीं जा सकता, और यही माया नहीं है। 

क्या होता है, माया में डूबना? 

Maya kya hai ?

व्यक्ति जब अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करने में पूरी तरह असमर्थ हो जाता है उस समय लोग उसे कहते है कि वह इंसान पूरी तरह माया में उलझा हुआ है। मतलब यही है कि वह जिंदगी के मूलो को भूल कर, छोटी छोटी तुच्छता दिखा रहा है।

 अर्थात मनुष्य ऐसे कामों में ऐसी चीजों की उत्पत्ति करने में फँस जाता है, जो बिल्कुल भी स्थायी नहीं है। जब आप यह जानते है कि कोई चीज स्थायी नहीं है, तो आपको उसमे अपना मन नहीं लगाना चाहिए ब्लकि आपको उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो सर्वज्ञ और सर्वथा है। (Maya kya hai ? )

माया हमेशा बदलती रहती है (माप बदलता रहता है) यदि आप इसमे फंसे तो यह आपको अपने आप अनुसार ही नियंत्रित करना सीख लेती है जैसे आज ज्यादा पैसे कमाएं है तो खुशी का अनुभव करते है और वही कल कम पैसे कमा पाए तो व्यक्ति दुःखी हो जाता है? क्या है यह? 

यह दर्शाता है कि आप माया के जाल में फंस चुके है, क्योंकि व्यक्ति को सिर्फ अपने कर्म से खुशी मिलनी चाहिए और अपने प्रयास करने चाहिए चिंता करना भी स्वभाविक है पर सब कुछ होते हुए भी और की इच्छा रखने के लिए रोना तो दुर्भाग्य ही होगा ना? 

आपके जीवन की अस्थिरता का मुख्य कारण क्या है आपको यह समझना बेहद जरूरी है क्योंकि ऐसे कुछ तुच्छ कारण जो आपको प्रभावित करने में लगे हैं वह माया में लिप्त होने के संकेत है।

 आप एक मुसाफिर है, तो आपको एक अच्छे वाहन की तलाश करनी चाहिए ना कि किसी वाहन के लिए चिंता करना चाहिए कि इसमे ऐसा हो गया, वैसा हो गया ” अर्थात्‌ आपका जीवन इसी प्रकार का है, जहां आपको सफर पूरा करना है, सफर को ठीक तरह से पूरा करने के लिए अच्छा और सुरक्षित वाहन का चुनाव करना आपका कर्तव्य है, लेकिन उसके प्रति अनावश्यक चिंता करना पूरी तरह व्यर्थ है क्योंकि यह माया है सत्य नहीं। (Maya kya hai ? )

हमेशा बदलती  हुयी तमाम घटनाएं और आपके आस-पास की चीजें ही माया हैं।  स्थिरता तब आती है जब आप अपने अंदर किसी ऐसी चीज पर लॉग ऑन करते हैं जो बदल नहीं रही है – जो पूरे समय एक समान रहती है।  इसे “माया के जाल से बाहर निकलना” कहा जाता है।

यू तो लोगों ने माया शब्द के जाने कितने ही अलग अलग अर्थ निकाले है जिसमें से एक और प्रमुख अर्थ है कि माया  जिसका कोई रूप है, लेकिन जब आप उसे पकड़ने की कोशिश करते हैं, तो वह आपके हाथ में नहीं आती है।  दुनिया में सब कुछ ऐसा ही है।  आपको कोई चीज बड़ी सुंदर लगती है, आपको आकर्षित करती है, आप उसके लिए तड़पने लगते है यहां तक कि यदि वह नहीं मिलती तो लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं।(Maya kya hai ? )

 लेकिन सत्य इन सब से परे है – सत्य यह है कि माया बदलती रहती है और जब आपको कोई ऐसी चीज मिल जाती है जिसे पाने के लिए आप बेहद जिज्ञासू थे – तो बाद में वही चीज आपको खराब लगने लगती है, आपकी नजरों में उसकी कीमत कम होने लगती है, और धीरे धीरे आप देखते है, कि आपकी नजरो में उसकी सुंदरता पूरी तरह खत्म हो गयी तो इस बात का निष्कर्ष यही है कि वह माया है, जो आपको आकर्षित करने का काम करती है, आपसे दूर रहकर आपको विचलित करने का काम करती है और यदि आप उसे गलती से हासिल भी कर लेते है तो वह अपना रूप बदल कर किसी और वस्तु में समाने लगती है और फिर आप उसके पीछे लग जाते हैं। 

जो कुछ भी आपको विचलित करता है भले भी वह कोई चीज हो या इंसान तो आपको यह समझना चाहिए कि यह माया है और इसका काम सिर्फ आपको आपके मूल लक्ष्य से भटकाना है इसके अतरिक्त माया आपको कोई संतुष्टि नहीं देगी यदि आप ऐसा सोचते है कि कोई महँगी गाड़ी लेकर आप खुद को संतुष्ट महसूस करेगे तो यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है इसी प्रकार यदि आप किसी महिला को पाना चाहते है और आपको लगता कि यदि वह महिला आपके जीवन में आयी तो आपको संतुष्टि मिलेगी तो यह भी माया है और आपकी सबसे बड़ी भूल। (Maya kya hai ? )

हालांकि आप अपने कर्म के लिए बिना किसी जिज्ञासा या अतिरिक्त चेष्टा के किसी भी चीज को पाने में सफल होते हैं तो बहुत अच्छा है लेकिन आप इस तरह से संतुष्टि ग्रहण नहीं कर सकते माया आपको अपने सुंदरता के जाल में फंसा लेती है और एकबार फंसने के बाद व्यक्ति कई तरह के दुख भोगता रहता है। 

जो आप किसी चीज को बहुत सुंदर देखते हैं, और आप उसे अपने पास रखने की कोशिश करते हैं।  जिस क्षण आप इसे धारण करते हैं, आप पाते हैं कि सुंदरता चली गई है। आपको लगता है कि खुशी बाहर है और आप उसके पीछे भागते रहते हो और ;  जब तुम वहाँ पहुँचते हो, तो वहां कोई खुशी कोई संतुष्टि नहीं होती, होता है तो सिर्फ दुःख ।(Maya kya hai ? )

यदि आप खुद से संतुष्ट है, अपने भीतर से , स्थिर और संतुष्ट हैं, तो दुनिया की सभी खास चीजे आपकी तरफ आकर्षित होती है। सब कुछ आपकी ओर दौड़ता है।  इसलिए मैंने शुरू से ही कहा है – अगर आप आनंद के पीछे भागते हैं , तो दुख आपके पीछे आएगा ही ;  और यदि आप ज्ञान का पालन करते हैं, तो आपको जिंदगी जीने का मज़ा आएगा ।

“हर वह चीज जो तुमको अपनी तरफ खींचती है, आकर्षित करती है, आपके मन में उसको पाने के भाव बनाती है, वह सब माया है, और उसका काम सिर्फ एक है, आपको आपके मूल मकसद से भटकाना जिसके बाद ना तो आपको आपका मकसद प्राप्त होता है, ना ही उस चीज से संतुष्टि मिलती है जिसकी तरफ आप भाग रहे होते हैं। “यही तो माया है ”  

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By Nihal chauhan

मैं Nihal Chauhan एक ऐसी सोच का संरक्षण कर रहा हू, जिसमें मेरे देश का विकास है। में इस हिंदुस्तान की संतान हू और मेरा कर्तव्य है कि में मेरे देश में रहने वाले सभी हिंदुस्तानियों को जागरूक करू और हिंदी भाषा को मजबूत करू। आपके सहयोग की मुझे और हिंदुस्तान को जरुरत है कृपया हमसे जुड़ कर हमे शेयर करके और प्रचार करके देश का और हिंदी भाषा का सहयोग करे।

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