ऋग्वेद के अनुसार 6 सबसे महत्वपूर्ण वैदिक देवता ऋग्वेद दुनिया का सबसे पुराना वेद है और इसे “छंदों का ग्यान” भी कहा जाता है। इसमें कुल 1028 सूक्त और 10,600 श्लोक शामिल हैं।  इसी के साथ चारो वेदों में ऋग्वेद सबसे पुराना वेद है ।मौखिक रूप से यह 1500 ईसा पूर्व का है जो कि समय समय पर मौखिक रूप से एक दूसरे को दिया जाता था किंतु लिखित रूप में यह वेद 300 ईशा पूर्व का है। यह वेद सनातन धर्म के बाकी शास्त्रों के बाद लिखे गए। 

चारो वेद अलग अलग देवताओं को समर्पित है इसी प्रकार से ऋग्वेद में अलग अलग देवताओं के बारे में उल्लेख किया गया है लेकिन इनमें कुछ खास देवताओं का खास महिमामंडन किया गया है। आज हम ऋग्वेद के अनुसार सनातन धर्म के 6 सबसे महत्वपूर्ण देवताओं के बारे में बतायेंगे जिनके बारे में ऋग्वेद में कई भजन बनाए गए हैं। 

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ऋग्वेद के अनुसार 6 सबसे महत्वपूर्ण वैदिक देवता

इंद्र – God Of Heaven (स्वर्ग का राजा) 

इंद्र के बारे में शायद अपने पहले से सुना हुआ होगा क्योंकि यह हिन्दुओं के प्रमुख देवताओं में से एक है। ऋग्वेद में इंद्र का विस्तृत विवरण है। वेद के अनुसार इंद्र सभी देवताओं के राजा है और वह एक योद्धा है। ऋग्वेद में इंद्र देव की महिमा में लिखे गए 289 वैदिक भजन उन्हें एक योद्धा देवता के रूप में चित्रित करते हैं, जिन्होंने गायों और नदियों को मुक्त करने के लिए बुराई का वध किया था। इंद्र देव को भारत की आम जनता बारिश कराने वाले प्रमुख देवता के रूप में भी जानते है और समय समय पर उनकी पूजा की जाती है। पृथ्वी पर बारिश होना इन्द्रदेव की कृपा ही मानी जाती है। 

इन्द्रदेव को उनके मुख्य हथियार वज्रा के साथ चित्रित किया गया है, जिसमें वह सफेद ऐरावत हाथी की सवारी करते हैं। 

अग्नि – (God Of Fire) 

अग्नि यानी कि आग का देवता। ऋग्वेद के 10 खंडों में 218 सूक्तो में अग्नि देवता को दर्शाया गया हैं। चुकीं अग्नि देवता किसानों की सहायता करते है इसलिए किसान विशेष रूप से इनकी पूजा करते है। आज भी खाना पकाने के बाद सबसे पहला भोग अग्नि देवता को ही खिलाया जाता है। वेद में बताया गया है कि अग्नि देवता किसानों की रक्षा करते थे जब भी उन्हें कोई आपदा आती थी जैसे कि अग्नि के उपयोग है खुद की सुरक्षा के लिए अंधेरे को मिटाने के लिए इस तरह से अग्नि लोगों के लिए सबसे महत्पूर्ण देवता थे। देवताओं ने अक्सर मानव में रहने वाली आत्माओं और बलिदानों को अग्नि के माध्यम से ही स्वीकार किया जैसाकि आप सब जानते है कि सनातन धर्म में कोई भी अनुष्ठान यज्ञ या अज्ञारी (हवन) के नहीं हो सकता। 

माना जाता है कि बिना अग्नि के कोई भी यज्ञ सफल नहीं हो सकता। चूंकि अग्नि का उपयोग बलि चढ़ाने के लिए भी किया जाता था, इसलिए अग्नि देवता को मनुष्यों और देवताओं के बीच दूत माना जाता है। सनातन धर्म के कुछ अन्य अनुयायी दावा करते हैं कि पृथ्वी, वातावरण और आकाश तीनों लोकों में अग्नि देवता की उपस्थिति ने अग्नि को ईश्वर का दूत बना दिया। वह अपने रूप में एकमात्र आग नहीं है, बल्कि वह अग्नि भी है जो बिजली और सूर्य को शक्ति प्रदान करती है। अर्थार्त सूर्य बिजली यह सब अग्नि देवता की कृपा से है जिसके कारण हम सब जिंदा है। अग्नि देव अपने वाहन के रूप में राम का उपयोग करते हैं।

वरुण – (God Of Water) 

पानी जीवन का आधार है और इसी पानी के देवता है वरुण। ऋग्वेद में वरुण को एक और प्रमुख देवता माना गया हैं। वरुण देव को समुद्र के स्वामी के रूप में चित्रित किया गया हैं।  सिर्फ समुद्र ही नहीं बल्कि पूरी प्रकृति के प्राकृतिक कानून और व्यवस्था के स्वामी वरुण ही है।  वे अपनी हज़ार आँखों से धार्मिकता और न्याय की देखरेख करते है।  

वरुण देवता शुरुआती तस्वीरों में एक रथ पर सवार दिखाई देते है जिसे हंसों द्वारा खींचा गया है और बाद की तस्वीरों में उन्हें मगरमच्छ की सवारी करते हुए दिखाया गया है।  वह शुरुआत में एक प्रमुख देवता थे लेकिन उन्होंने इंद्र और प्रजापति को अपने पदो को प्रदान कर देते हैं ।  पूरे ऋग्वेद में उन्हें 46 सूक्त समर्पित किए गए हैं। वेदों में उन्हें पश्चिम दिशा का संरक्षक माना गया है।

वायु – (God Of Air) 

वायु अर्थात हम जो साँस लेते है वह वायु देवता की ही बदोलत है। वायु को हमेशा प्राणों के साथ जोड़ा गया है। बिना वायु के जीवन सम्भव नहीं है। वायु देव की सवारी बेहद विध्वंसक शक्तिशाली गज़ेल को दर्शाया गया है । वेदों और पुराणों में उन्हें बहुत शक्तिशाली देवता के रूप में जाना जाता है। ऋग्वेद में समर्पित 12 सूक्त उनकी सुंदरता का वर्णन करते हैं।  वायु देव विचारों, सौंदर्य और बुद्धि के स्वामी की उपाधि धारण करते है।

सूर्य : (God Of Sun) 

सूर्य को हम सूरज और अंग्रजी में Sun के नाम से जानते है। ऋग्वेद में सूर्य देव को सूर्य और सावित्री कहा गया है।  देखा जाए तो विष्णु शब्द वास्तव में वैदिक युग में सूर्य देव का नाम था। सूर्य देव की कृपा से ही धरती पर जीवन सम्भव है इसलिए आज भी उनकी पूजा अर्चना होती है। वेद के अनुसार सूर्य देव सोने के एक रथ पर सवार है जिसे 7 घोड़े एक साथ खींचते है। Rig veda में भले ही 8 सूक्तियां उन्हें आंशिक रूप से समर्पित थी लेकिन गायत्री मंत्र मूल रूप से उन्हें समर्पित था।

यम या यमराज – (God Of Death) 

मृत्यु का देवता अर्थात एक ऐसा देवता जो सभी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। हम उन्हें यमराज के रूप में आज भी अच्छे से जानते है। हालांकि ऋग्वेद में यम देव के बहुत कम सूक्त दिए गए हैं, लेकिन वे वेद के महत्वपूर्ण देवताओं में बहुत ऊंचे स्थान पर हैं। 

वेदों और शास्त्रों में यमराज को न्याय के स्वामी और मृतकों के राजा के रूप में वर्णित किया गया हैं, जो अपनी गदा और फंदा का उपयोग करके मृत को अपनी दुनिया में घसीटते या खींचते हैं।  वह इंसान के पाप पुण्य का लेखा जोखा देखकर मारने के बाद उसकी आत्मा को दण्डित करते है। यदि कोई पापी व्यक्ति है तो उसे नर्क लोक के जाते है। जहाँ उसे कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती है वही यदि आप अच्छे व्यक्ति हैं और पुण्य धर्म करते है तो आपको स्वर्ग लोक प्राप्त होता है जहां सुन्दर सुन्दर अप्सरा है और सारी चीजें सुख पहुंचाने वाली है। 

यमराज उन सभी लेखा जोखा के अनुसार व्यक्ति को पूरी सजा दिलाते हैं। माना जाता है कि आप मानव तन के साथ जितना गलत करोगे या अच्छा करोगे सबका हिसाब यमराज के पास होता है और वह उसी प्रकार से उनके साथ पेश आता है। 

यम राज अपनी सवारी के लिए एक स्वर्गलोकी भैसे के साथ हाथ में एक फंडा लेकर आते है और आत्मा को फंदे में फंसाकर ले आते है। 

 के साथ हाथ में एक फंडा लेकर आते है और आत्मा को फंदे में फंसाकर ले आते है। 

यमराज के  पास दो कुत्ते भी हैं जिनकी चार आंखें और चौड़ी नाक है;  वे यमराज की दुनिया (यमलोक) के द्वार की रक्षा करते हैं।

Rig veda के अनुसार कुछ अन्य महत्वपूर्ण देवता – 

सरस्वती: – 

ऋग्वेद में यमुना के साथ बहने वाली नदी की देवी। बाद में, उस नदी के सूखने के बाद वह एक स्वतंत्र (देवी) बन गईं।  आज सनातन धर्म में उन्हें विद्या या ज्ञान की देवी के रूप में  जाना जाता है।

सोम: 

उन्हें पौधों के देवता के रूप में जाना जाता है।  सोम का उपयोग अनुष्ठान पेय को दर्शाने के लिए भी किया गया है

विष्णु: 

उन्हें इंद्र से निम्न स्थिति में माना जाता था, और इसलिए उनका नाम उपेंद्र पड़ा।

द्यौस: 

स्वर्ग के पिता।

अदिति: 

अनंत काल की देवी

ईश्वर: 

ब्रह्मांड के सर्वोच्च देवता

अश्विनी/अश्विनी/अश्विनी कुमार: 

उपचार शक्तियों के साथ जुड़वाँ बच्चे।

मारुत: 

तूफान और विनाश के स्वामी।

रुद्र:

रुद्र बाद के अधिक प्रमुख भगवान शिव का एक आदिम रूप है।

मित्रा: 

वरुण के साथ संरक्षक देवता।  वह इंद्र के साथ प्रकट होता है।

प्रज्ञा: 

वर्षा का स्वामी।

मन्यु: 

युद्ध के स्वामी।

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By Nihal chauhan

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