Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva भक्ति क्या है? यह एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है प्रतिज्ञा करना। सिर्फ प्रतिज्ञा ही बल्कि एक गंभीर प्रतिज्ञा या वादा करना। एक समर्पित व्यक्ति खुद को पूरी तरह से भगवान की सेवा में आत्मसमर्पण कर देता है।  और सावन ऐसी परम भक्ति का महीना है। सावन के महीने से जुड़ी कई तरह की अलग अलग पौराणिक कथा मौजूदा है जिसमें से कुछ एक को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया जाता है। 

सावन का यह पवित्र महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए सबसे पवित्र महीना है। धर्म गुरुओं का मानना है कि साल के किसी अन्य महीने में शिव पूजा करने की अपेक्षा सावन के महीने में पूजा का अधिक फल प्राप्त होता है या आप शिव को सावन के महीने में असानी से प्रसन्न कर लेते है जिससे आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

अपनी भक्ति के कारण, शिव भक्त जानबूझकर सावन महीने में भगवान शिव की पूजा करना चुनते हैं और उनकी भक्ति अंतहीन प्रेम से भर जाती है। उनका मानना ​​है कि भगवान शिव उन्हें समृद्धि और चिरस्थायी सुख प्रदान करेंगे।  नतीजतन, भक्तों को सावन के दौरान महादेव के लिए अपनी गहरी आराधना व्यक्त करने से कोई नहीं रोक सकता है।

Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva

Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva

क्यों है सावन में शिव पूजा महत्त्व? जानिए सावन से जुड़ी शिव और पार्वती की पौराणिक कथा – 

पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन के महीने में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है। कथा के अनुसार देवी सती (पार्वती) ने जब अपने पिता राजा दक्ष के यहां योग शक्ति द्वारा देह का त्याग करने से पहले उन्होंने अपने मन की मन में प्रण लिया था कि वो हर जन्म में भगवान शिव की पत्नि बने और इसके उपरांत उन्होंने योग शक्ति द्वारा अपने देह का त्याग कर दिया। माता पार्वती का दूसरा जन्म राजा हिमाचल और रानी मैना के घर जन्मीं जहां उन्हें “पार्वती” (सती) नाम मिला।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

माता पार्वती ने पहले ही प्रण किया हुआ था कि वह शिव की पत्नि बनेगी इसलिए उन्होंने जैसे ही युवावस्था ग्रहण की तो वह शिव अराधना में लीन हो गयी। उन्होंने शिव शंकर को मनाने के कई प्रयास किए लेकिन उन्हें सफ़लता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सावन के महीने में शिव अभिषेक और उपवास रखा जिससे बाद शिव शंकर प्रसन्न होकर माता पार्वती के सामने प्रकट हुए और उन्होंने उनसे शादी की। और उसी समय से दुनिया को यह ज्ञात हुआ कि शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन माह का बेहद महत्व है। 

शिव के लिए अटूट प्रेम और श्रद्धा – 

Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva

सावन के महीने में शिव भक्तों की इतनी तीव्र श्रद्धा होती है कि वह इस महीने में दूर दूर शिव मंदिरों और शिव लिंग दर्शनं के लिए निकल जाते है। पवित्र महीने के दौरान, कई भक्त उनका आशीर्वाद लेने के लिए वार्षिक तीर्थयात्रा पर जाकर अपार कष्ट सहते हैं।  हालांकि शिव भक्तों की इन तीर्थयात्राओ, पर इस साल COVID-19 के कारण स्थगित कर दिया गया है, यह उनके लिए बहुत चुनौतीपूर्ण है।   (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

सावन के महीने के दौरान शिव भक्तों में एक और प्रथा प्रचलित है। इस प्रथा के अनुसार शिव भक्त पैदल चलकर और अपने कंधे पर कावड रखकर कठिनाइयों का सामना करते हुए दूर गंगा नदी से गंगा जल लाते है और शिव अभिषेक करते है। (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

 रास्ते में जगह जगह शिव भक्तों द्वारा उनके स्वागत में कई समरोह किए जाते है। कावड लाने में सबसे कठिन परीक्षा यह है कि आप उसे नीचे नहीं रख सकते यह हमेशा कंधे पर रहती है सिर्फ शिव जी के अभिषेक के बाद ही आप इसे नीचे रख सकते हैं। 

अपने कंधों पर कावड़ (गंगा के पवित्र जल से भरे हुए छोटे  विशेष बर्तन) के साथ छालो से भरे हुए नंगे पांव चलते हुए, भक्त कष्टदायी शारीरिक पीड़ा को नजरअंदाज करते हुए अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ते रहते हैं। पहाड़ों और शहरों से गुजरती हुयीं शिव भक्तों की टोली अलग अलग धर्मिक नारे लगाते हैं जैसे – “हो भोला तेरी बम बम भोले” शिव शंकर के कीर्तन करते हुए भक्त अपनी पूरी शक्ति और ऊर्जा से अपनी कावड़ यात्रा पूरी करते हैं। (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

 उनकी गहन भक्ति उन्हें इतना बड़ा धीरज देती है कि शिव भक्त बिना किसी समस्या के यह यात्रा हर साल पूरी करते है ।  इस कठिन यात्रा को अंजाम देकर, वे भगवान शिव के प्रति अपने अटूट प्रेम को प्रदर्शित करते हैं।  ऐसा लगता है कि भक्त भगवान शिव के समान हो गए हैं और वे उन्हें साहस से भर रहे हैं।

सावन के महीने में कावड़ यात्रा शिव भक्तों की भक्ति है जो उन्हें अपने इस्ट भगवान शिव की सेवा करने के लिए शारीरिक सीमाओं से परे धकेलती है।  यह उनके प्रति उनके संपूर्ण आत्म का उत्सवपूर्ण समर्पण है।  हालांकि हर भक्त कावड़ यात्रा नहीं कर पाते इसलिए वह अपनी भक्ति अन्य माध्यमों से प्रदर्शित करते हैं।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

प्रार्थनापूर्ण भक्ति उनकी सात्विक जीवन शैली और दैनिक प्रार्थनाओं के माध्यम से भी प्रकट होती है। कई भक्त सावन के हर सोमवार को उपवास रखते हैं और कई भक्त ऐसे है जो पूरे महीने उपवास का अभ्यास करते हैं।  वे भगवान शिव के निकट रहना चाहते हैं, दृढ़ रहते हैं और अपना अधिकतर समय प्रार्थना और ध्यान में बिताते हैं।

आशीष और आशीर्वाद प्राप्त करने का सावन महीना – 

सनातन धर्म के मिले सभी शास्त्र इस बात की पुष्टि करते है कि सनातन धर्म के किसी भी देवता को प्रसन्न करने से आसान है आप शिव की उपासना करे क्योंकि शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं और शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन माह सबसे उपर्युक्त है। शिव को किसी के भी द्वारा प्रसन्न किया जा सकता है इसीलिए उनका नाम – “आशुतोष” है।  आशुतोष यानी कि जो बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव किसी जाति विशेष के भगवान नहीं है बल्कि वे सभी से प्रेम करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

शिव के भोलेपन के बारे में एक कहानी बड़ी प्रचलित है – 

एक बार एक चोर चोरी करने के इरादे से निकला लेकिन उसने पूरा इलाका देख लिए उसे चोरी करने के लिए कोई जगह नहीं मिली। इसके बाद वह दुखी होने लगा और शिव को याद करने लगा, शिव जी से उसकी यह दशा देखी नहीं गयी और उन्होंने उसे खयाल दिया और उसे अपने ही एक मंदिर में पहुंचा दिया।

मंदिर बहुत भव्य था, और मंदिर के भीतर सोने और चांदी के घन्टे (bell) लगे हुए थे। चोर के मन में ख्याल आया कि शिव मंदिर के इन्हीं घंटों को चुरा कर वह चला जाएगा। लेकिन उसने काफी समय तक प्रयास किया वह सोने के घंटों तक नहीं पहुंच पाया क्योंकि घंटे थोड़ी ऊचाई पर लगे थे।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

चोर परेशान होकर फिर रोने लगा और विलाप करते हुए फिर शिव जी को याद करने लगा। शिव जी उसके विश्वास से प्रसन्न होकर दुबारा उसके खयाल में आए और उसे बताया कि वह उनके शिवलिंग पर पैर रखकर सोने के घटे को चुरा ले। चोर ने प्रसन्न होकर चोरी की और घन्टा लेकर चला गया। बाद में जब चोर को एहसास हुआ कि साक्षात शिव ने उसे मार्ग दर्शनं दिया तो उसने चोरी छोड़कर घंटे को वापस शिव मंदिर पर लगाया और खुद हमेशा के लिए योगी हो गया। 

शिव अपने भक्तों को सरल-हृदय का धार्मिक उत्साह का आशीर्वाद देते हैं, वह पवित्र भक्तों को शांति प्रदान करते हैं, और उन साधकों से जुड़ते हैं जो उनका ध्यान करते हैं।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

शिव की भक्ति हर सवाल का जवाब देती हैं – 

शिव दुनिया के विनाशक यानि कि “Destroyer” है उनका प्रचंड क्रोध इतना विध्वंसक है कि पलक झपकते ही पूरे ब्रहमांड को नष्ट कर दे। लेकिन उन्हें प्रसन्न करना भी उतना ही आसान है। आपके मन में कई सवाल उठते होंगे, लेकिन आप उनके जबाब अब तक नहीं तराश पाए है। आपको शिव की उपासना करनी चाहिए और शिव का ध्यान करना चाहिए। निश्चित ही आपको सभी जबाब मिलेगे बशर्ते आप उन पर अपना पूरा विश्वास जगाए।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

हमारा जीवन परिवर्तन के बारे में है। हर चीज़ बदलती है ।  इस बदलती हुयीं दुनिया में रहने के लिए हमे कई सवालों के जवाब चाहिए होते हैं। हमें हमेशा प्रश्नों का सामना करना पड़ता है जैसे कि जीवन में क्या करना है, किस दिशा को चुनना है, हमें क्या चुनाव करना चाहिए, हमें जीवनयापन के लिए क्या करना चाहिए, नियमित रूप से ध्यान कैसे करना चाहिए आदि। यहां सिर्फ कुछ ही ऐसे सवाल दिए है किन्तु ऐसे कई प्रश्न हैं जिनका हम अपने जीवन में सामना करते हैं। लेकिन सवालों के जवाब कहां मिलते हैं?

जब आप अकेले अपनी दोनों आँखों की बंद करके पूरे विश्वास के साथ शिव को याद करते है तो वह आपके जीवन को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। देश दुनिया के करोडों शिव भक्त इस बात का जीता जागता उदहारण है। 

जीवन में हमे क्या करना है यह जानने के लिए हमे सच्चे मन से उनका ध्यान करने की आवश्यकता है और उनसे पूछे वह आपको आंतरिक जागरण और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आपको बस अपनी पूरी निष्ठा से भक्ति के साथ अपने किसी भी सवाल को पूछने की जरूरत है और इसी उद्देश्य से भक्त सावन के इस महीने को चुनते हैं।  (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

 शिव शांति के स्वरुप है। वह अपने भक्तों की सुनते है। आप जब उनके सामने बैठ कर ध्यान लगाते है तो वह आपके अन्तःकरण को शुद्ध करके आपके भीतर की नकारात्मकता को खत्म कर देते हैं। वह आपको आशीर्वाद देते हैं। 

तो, सावन के इस शुभ महीने में, आइए हम अपने भीतर की दुनिया में शिव तत्व की उपस्थिति का जश्न मनाएं और उनके समान महसूस करें।  आइए हम प्रार्थना करें, शिव का ध्यान करें और जरूरतमंदों की सेवा करने जैसे नेक काम भी करें। (Sawan Mein Shiv Pooja Ka Mahatva)

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By Nihal chauhan

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